एक लड़की की तुम्हे
क्या सुनाउ दास्ताँ
एक लड़की की तुम्हे
क्या सुनाउ दास्ताँ
वह पगली है सब से जुदा
हर पल नयी उसकी अदा
फूल बरसे लोग तरसे
जाए वह लड़की जहाँ
एक लड़की की तुम्हे
क्या सुनाउ दास्ताँ
एक लड़की की तुम्हे
क्या सुनाउ दास्ताँ
है ख़फ़ा तो ख़फ़ा
फिर खुद ही वह मान भी जाती है
लाती है होठों पे मुस्कान वह
चुप है तो चुप है वह
फिर खुद ही वह गुण गुणाती है
गाती है मीठी मीठी गाने वह
कैसे कहूँ कैसी है वो
बस अपने ही जैसी है वह
फूल बरसे लोग तरसे
जाए वह लड़की जहाँ
एक लड़की की तुम्हे
क्या सुनाउ दास्ताँ
एक लड़की की तुम्हे
क्या सुनाउ दास्ताँ
आज कल हर वह पल
बीता जो था उसके साथ में
क्या कहूँ
ख़्वाबों में आता है क्यों
याद जो आये तो
उसे बिछड़ने की वह घड़ी
क्या कहूँ
दिल टूट सा जाता है क्यों
अब मैं कहीं वह है कहीं
पर है दुवा ए हम नशीं
फूल बरसे लोग तरसे
जाए वह लड़की जहाँ
एक लड़की की तुम्हे
क्या सुनाउ दास्ताँ
एक लड़की की तुम्हे
क्या सुनाउ दास्ताँ
वह पगली है सब से जुदा
हर पल नयी उसकी अदा
फूल बरसे लोग तरस
जाए वह लड़की जहाँ
एक लड़की की तुम्हे
क्या सुनाउ दास्ताँ
एक लड़की की तुम्हे
क्या सुनाउ दास्ताँ.