नाजाने क्यों हमेशा मेरे साथ ही ऐसा होता है,
जिसे बहोत चाहा हो दिलने वही दूर होता है ।
दोस्ती की शुरुआत हर किसीके साथ अलग हुई,
पर अंत, हमेशा एक जैसा ही क्यों होता है ।
मन नही होता अब नए लोगो से मिलने का,
क्योंकि जानती हूं, चाहे कोई पहले कितना भी खास बनाले,
बाद में दूर ही होने वाला है ।
ऐ ख़ुदा..भला ऐसी भी क्या की थी मेने खता,
की एक बार नही, हर बार तू मेरे साथ ऐसा ही करता है ।
नाजाने क्यों हमेशा मेरे साथ ही ऐसा होता है ।
~ रुचिता गाबाणी