मुद्दतें लगती है अपना बनाने में
लोग लम्हो में पराया कर देते हैं
सिर्फ एक लम्हे की तलाश में होता है
निभाने वाला भी और जाने वाला भी
जाते-जाते उसने हमें एक जुमला कह कर रुला दिया
जब गम बर्दाश्त नहीं कर सकते तो मोहब्बत क्यों करते हो
यह तुमसे कह दिया किसने की बाजी हार बैठे हैं हम
अभी तुम पे लुटाने को अपनी जान बाकी है
कभी करीब कभी दूर होके रोते हैं
मोहब्बतों के मौसम भी बड़े अजीब होते हैं
मुद्दतों बाद आज फिर परेशान हुआ है दिल
जाने किस हाल में होगा मुझे छोड़ने वाला