सुप्रभात
तुम्हारे साथ हम जी लें
सुहानी भोर आओ तो।
अरुण की लालिमा का
सुंदर मंजर दिखाओ तो।
परिंदे गा रहे हैं मीठे
स्वर में राग ईश्वर का
मेरे सोये हुए मनको
कलरव से जगाओ तो।।
तुम्हारे नयनाभिराम रूप
को अपनी आँखों में भर लूँ
झुरमुट की ओट से
अपना चेहरा दिखाओ तो।
आत्मा की जोड़ दूँ
परमात्मा के संग
इबादत का सबक ऐसा
मुझको सिखाओ तो।।
स्वरचित
जमीला खातून