सीकवा है कागज़ो से के बड़े नाम समाए फिरता है
पता नहीं तुझे पत्थर बांध पेंट में एक बच्चा भूखा सोता है
मौसम सर्द है बाहर ना उसका कोई यहां है
एक अखबार है सिरोना ना उसका कोई मकान है
छपी देखी है एक खबर तेरी कीमत सस्ती लगी है
दिखावा भलाई का है और तस्वीर बड़ी छपी है
ज़ुल्म तेरा और ना तेरा कोई निशान है
सब कुछ है फैला दिया यहां फिर तू खुद अनजान है
कोरे काग़ज़ के बदले छपे काग़ज़ मिलते है मुझे ये पता है
दिल देहेल जाता है पढ़ने वालो का क्या तुझे पता है?
- अमन समा