"''''सुहागरात""'
सिद्धार्थ टैरेस पर घंटो खड़े होकर सिगरेट के धुएं को छोड़ता दूर.....न जाने किस सोच में डूबा था । उसे किसी की खबर तक नहीं ।
इस बीच पम्मी जाने कितनी बार छत पर आई और चली गयी मगर सिद्धार्थ कहीं और ही खोया रहा।
सिगरेट का आखिरी कश लेते हुए सिद्धार्थ ने आसमान की तरफ देखा और मुंह से धुएं का एक लंबा गुबार छोड़ दिया।
""सिद्धार्थ .....?" पम्मी ने धीरे से आवाज़ दी
"हम्म "
""मैं नीचे कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी"।
"" सॉरी .. "
"इट्स ओके सिद्धार्थ ..अब हम चलें नीचे ? आज हमारी सुहागरात है "।
"" सुहागरात ???? "
""हां ..सुहागरात "
हा हा हा हा हा हा हा .....सिद्धार्थ ज़ोर ज़ोर से हंसता है
फिर पम्मी का हाथ अपने हाथ मे थाम कर पम्मी की आंखों में कुछ कहते कहते डूब जाता है ।
पम्मी जानती हो तुम मेरी बेस्ट फ्रेंड थी । बचपन से लेकर आज तक मैंने अपनी सारी बातें तुम से ही शेयर करता आया हूँ। अपना सुख दुख सब तुमसे। लेकिन मैने तुम्हें कभी भी पत्नी के रूप में नही देखा। कभी नहीं सोचा कि तुम मेरी .....।
तुम्हारे औऱ मेरे मॉम डैड ने हम दोनों को शादी के बंधन में बंधवा दिया । मैंने आज अपने एक अच्छे दोस्त को खो दिया।
सिद्धार्थ कहता रहा और पम्मी के आंखों से अश्क़ बहते रहे ..........