जब जब कलम हाथ में लेता हूं
उसे ख़्वाबों में बुनता हूं
उसकी सुंदरता को लिखता हूं
उसे अपनी लेखनी से महसूस करता हूं
जब जब कलम हाथ में लेता हूं
वो चांद सा मुखड़ा देखता हूं
उसकी हॉटनेस में झुलता हूं
उसका साथ ख़्वाबों में बुनता हूं
उसकी मासूमियत को निहारता हूं
उसकी खुशबु को हवा में फिल करता हूं
कलम से उसकी तस्वीर को बयां करता हूं
जब जब कलम हाथ में लेता हूं
उसका रूठना इमैजिन करता हूं
उसके रूठे हुए मुखड़े को
में ख़्वाबों में मानता हुआ ख़ुद को देखता हूं
उसको मनाने के बाद उसकी
स्माइल से प्यार के समुंदर में गोते लगता हूं
जब जब कलम हाथ में लेता हूं
उसे ख़्वाबों में बुनता हूं
उसकी शैतानियों को कागजों पर लिखता हूं
लेकिन उसकी शैतानियों में बसे प्यार को
अपने दिल में बसा लेता हूं
मेरे जीवन में उसके किरदार को
कलम की स्याही से कोरे पन्हे पर लिखता हूं
जब जब कलम हाथ में लेता हूं
उसे ख़्वाबों में बुनता हूं
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