उजाले का है त्योहार अंधकार को दूर भगायेंगे,
रंगो की रंगोली से घर के आँगन को सजायेंगे
उजाले का है त्योहार अंधकार को दूर भगायेंगे,
गम को भूलाकर 'जल' की तरह आगे बढ़ते रहेंगे
रोना - धोना छोड़ के फूलो की तरह हँसते रहेंगे
छोड़ दिया द्वेषभाव को, प्रीत की रीत निभायेंगे
उजाले का है त्योहार अंधकार को दूर भगायेंगे,
चाँद,सूरज है आसमान में तारों की है बारात,
प्यार को प्यार ही जाने, कैसे कहूँ में ये बात,
नयें साल के शुभ दिन पर खुशियों के गीत गायेंगे
उजाले का है त्योहार अंधकार को दूर भगायेंगे,
*कवि जलरूप*