चाहत (एक सफ़र चाहत का)
कितनी चाहत भरी होगी उनके दिल में आपके लिए
जिसने बहुत कुछ खोया आपको पाने के लिए।।
कितनी चाहत भरी होगी उनके दिल में आपके लिए
जो खुद नहीं रूठे आप को मनाने के लिए।।
कितनी चाहत भरी होगी उनके दिल में आपके लिए
जो घंटों भूखे रहे आप को खिलाने के लिए।।
कितनी चाहत भरी होगी उनके दिल में आपके लिए
जो दुनिया से लड़ गए आप को हंसाने के लिए।।
कितनी चाहत रही होगी उनके दिल में आपके लिए
जो खुद लोट आए दूर जाने के बाद।।
कितनी चाहत रही होगी उनके दिल में आपके लिए
जो खुद ही मान जाते हैं। रूठ जाने के बाद।।
कितनी चाहत रही होगी उनके दिल में आपके लिए।।
जो सपने में भी आपको देखना चाहते हैं सो जाने के बाद।
यह माना कि चाहत दिखाई नहीं जाती
पर इसमें गहराई इतनी है कि छिपाई नहीं जाती।।
रूठ जाती है मोहब्बत, पर चाहत वफा करती है
रोती है आँखे ! पर चाहत सिर्फ सिसकियां भर्ती है।।
ऐ मोहब्बत करने वालों चाहत का कभी इम्तिहान मत लेना। अगर दे ना सके कुछ तो अपनी चाहत की जान मत लेना। भंवरों को फूल मिल जाते है, पर फूलों को कलियां कभी-कभी मिलती है।।
मिल जाती है दुनिया में मोहब्बत ! पर ऐसी चाहत किस्मत। वालों को मिलती है। ।। — रेनू