# शानदार कविता ...
# विषय .मतदाता की पुकार ***
ओ बेवफा नेताजी ,कभी हमारी भी सुन लो ।
हम तुमको ईश्वर ,समझ सदा जीताते रहे ।।
पर कुर्सी पाकर ,तुम केवल धन जोडने में रहे ।
हमारे मत का ,तुमने उचित दाम नही चुकाये ।।
सदा वादे पर वादा ,ही देते तुम चले आये ।
हमारी दशा आज भी ,वैसी की वैसी ही हे ।।
तुम्हारे वारेन्यारे बैक बैलेंस ,सदा बढ़ते ही गये ।
हमें क्या मिला ,हम तो आज भी आंसू बहाते आये ।।
अब तो सच्चे दिल ,से हमारा उपकार तुम कर दो ।
मतदाता के मत का ,सही मूल्य अब तो चूका दो ।।
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