छोटी सी आशा
कितनी छोटी सी थी आशा
जब कुछ ही जोड़े कपड़ों में फूले न समाते
उनमें भी कुछ होते थे नए तो कुछ पुराने
अपने से बड़ों के कपड़े जब उन्हें छोटे होते
मेरी साइज के हो जाते उनके एक जोड़े जूते
बड़े आराम से पहन कर उन्हें हम थे इठलाते
आज हमारी आलमारी भरी पड़ी है भले
नए डिजाइन के कीमती जूतों और कपड़ों से
फिर भी पहले सा सुकून नहीं पा सकते
काश फिर से वही दिन हमारे लौट आते
एक बार फिर से हम वही छोटे हो जाते
रह जाती वही छोटी सी आशा