छन्दमुक्त कविता ..
विषय .जिदंगी ...
भुल जाओ दुनियाँ को ,अपने आप में मस्त रहो ।
माफ कर दो उन सब को ,जिन्होने दर्द दिए आपको ।।
छोटी सी जिदंगी में ,रुसवाईयाँ सब से छोड़ दो ।
प्रेय सब में बाँटो ,गिलेशिकवे सब अपने भुला दो ।।
क्या लेकर आए हो ,क्या लेकर तुम यहाँ से जाओगे ।
मुठ्ठी बाँध के आए थे ,हाथ पसारे तुम यहाँ से जाओगे ।।
तन को खुबसूरत बनाओ ,कुछ परोपकार के पलो से ।
तुम भले ना रहो ,पर तुम्हारी यादें हमेशा यहाँ रहे ।।
बुरे भाव त्याग दो ,दिल में प्रेम की गंगा बहा दो ।
जिदंगी खुद के लिए नही ,ओरो के लिए लुटा दो ।।
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