इंतज़ार-ए-यार
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मेरे ये ग़म बन कर शूल है खड़े मेरी ख़ातिर
आप आओ तो ख़ुशी फूल चुने मेरी ख़ातिर
अब घुट के न मर जाएं इस हसीन फ़ज़ा में
जन्नत की हवा भी हुई ज़हर हे मेरी ख़ातिर
जान-ए-जाँ अब ख़त्म कर दो मेरा इंतज़ार
आओ के वीरानों में गुल खिले मेरी ख़ातिर
अब ये आंखें थक रहीं हैं आपके इंतज़ार में
चले आओ मेरी ओर मेरे लिये मेरी ख़ातिर
मेरी उदासी का बाइस आजकल वो हुए हैं
खुशियों की जो दुआ करते थे मेरी ख़ातिर
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- सन्तोष दौनेरिया
(ख़ातिर- वास्ते, हसीन - सुंदर, फ़ज़ा - वातावरण, जन्नत - स्वर्ग, जान-ए-जाँ - प्राणाधार, बाइस - कारण)
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