अहंकार बढ़ जाए अगर खुदके मर्द होने का,,,!
स्त्री का वजूद छीन लेता है जीने की उम्मीद से,,,!
दरिंदगी इतनी बुरी हो जाती है इंसानियत के सीने की,,,!
जब नौचा जाता है जिस्म को, हर चिखो पर भी,,,!
कोई जात पात नही यहा हर हैवान एक सा है,,,,!
हिन्दू मुस्लिम नहीं यहां कोई फक्र करे अपना होने का,,,!
व्यवहार जब खुद की मा बहेन से होगा बलात्कार का ,,,!
तब जीते जी चीख जाएगी रूह और चलेंगे इंसाफ देने को!
DEAR ZINDAGI 😔🙏