खेल खेल मे खो दिया
हमने अपना वो भोलापन , मासूमियत
जो अब ढूंढ़ने से भी नहीं मिलती l
वो बेफ़िक्री , जब ज़िन्दगी की कोई मंजिल ना थी
बस चलते थे अपनी ही मस्ती में ,
खो दिया वो बचपन , जिस के खेल थे निराले l
खो दिया खुद को ही,
इस ज़िन्दगी मे खुद को ढूंढ़ने के लिए l
navita 🎼