मैं गया था उस मोहल्ले में
फिर से एक बार
जहां पर हम मिला करते थे
दिन में कई बार
आज भी वो शाम उतनी ही हसीन है
आज भी वो सुबह उतनी ही खुशनुमा है
वहीं पत्ते वहीं पेड़
वही तितलियां वहीं खुशबुएं
ना थी एक चीज और वो थी तेरी रूह
में बार बार ढूंढ़ता रहा
फिर से एक बार
ना जाने क्यूं थी एक आश
मिलेंगे हम फिर से एक बार
में गया था उस मोहल्ले में
फिर से एक बार
जहां पर हम मिला करते थे
दिन में कई बार