हिन्दी की पीड़ा
हिन्दी से पूँछा , हँसकर मैने,
क्या हाल तुम्हारा है बोलो ?
टेढ़ी आँखों से देख मुझे,
फिर नम्रभाव से बोल पड़ी |
अच्छा ! अब समझ गई मै भी !!,
क्यों हाल हमारा पूँछ रहे |
लाओ मुझको गुलदस्ते दो ! ,
दिन बीते, फिर कूच करो |
एक दिन मुझको आशा देकर ,
क्या फर्ज निभाने आये हो ,
जन्मी हूँ इसी धरा पर मैं ,
या कर्ज चुकाने आये हो |