आज हर एक वो औरत की अंदर कहीं ना कहीं एक अमृता आज भी जिंदा हैं और हमेशा जिंदा रहेंगी।और
वो कलम के ज़रिए कहीं ना कहीं कीसी भी कागज़ पे होंगी।
वो रूह के ऐहसास में होंगी,तो
वो जिस्म के लिबास में होंगी।
वो लफ़्ज़ों के जज्बातों में होंगी,तो
वो गानों के नज़्म में होंगी।
वो बातों के लेहजो के रूप तमीज में होंगी,तो
वो सोच के उस तौर तरीकों के में होंगी।
वो सिगार के धुएं में होंगी,तो
वो शराब के उस पेयमनो में होंगी।
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केशर कुंज