निरहू
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मूड़ फोरि-फोरि घिघियाने निरहू जब
मेहरी का बैठाय लिहिन है घुरहू जब
करमन कइहां रोय-रोय ऊ कोसत हैं
बेझरा रोटी पोय रहे हैं निरहू जब
गिरा दउंगरा कथरी भीगी, सिसक उठे
देखिन भीगी बीड़ी-माचिस निरहू जब
टुटहा छप्पर, गीली कथरी फिर भी मुस्काये
देखि लिहिन मेहरी का आवत निरहू जब
लै कै रिक्शा शहर का भागे, खूब कमाइन
रोटी मेहरिक हाथेस खाइन निरहू जब
राजेश ओझा