जब हम एक दूसरे के साथ होते थे..तो एक दूसरे की दुनिया होते थे..पर कुछ लम्हों के बाद जब हम अपनी अपनी दुनिया में जाते थे तो... तुम्हारी दुनिया में ख़ुद को ढूँढने की जदोजहद करनी पड़ती थी..वहाँ मेरा वजूद कहीं नहीं मिलता था..तो लौट आई मैं..क्यूँकि मुझे वहाँ रहना था..जहाँ मेरे न होने पर भी..मेरा वजूद कायम रहे।।