मैं कल कल करती आती थी
तू माँ मुझे बुलाती थी
तू इतना याद करती थी
मैं तुझे ना घर बुलाती थी ।
तूने मेरा कर्म खुदाया था
मैं छाव से होकर निकलती थी
तू माँ मुझे बुलाती थी
मैं कल कल करती आती थी ।
मैं तेरा घर छोड़ गई थी
तूने बाहों में मेरी तस्वीर रखी थी
तू इतना प्यार करती थी
मैं कल कल करती आती थी ।
तूने मुझे इस जगत में लाया था
तूने ही तो चलना सिखाया था
हर मुसीबत से संभाला था
मैं कल कल करती आती थी
तू माँ मुझे बुलाती थी।
मेरे हर दुख का भागी बनती थी
तू माँ कितनी सहन करती थी
तेरे प्यार को मैं ना समझी थी
तू इतना प्यार करती थी
मैं कल कल करती आती थी।
तू गोदी में मुझे सुलाती थी
तू इतना लाड़ प्यार देती थी
लोहरिया गा के सुलाती थी
तू इतना प्यार करती थी
मैं कल कल करती आती थी ।
मैं तुझसे इतनी क्यों पराई थी
मैं समझी तेरे प्यार की कुँवारी हु
छोड़ गई जब तेरा आँगन
फिर भर नहीं सकता मेरा आँचल
तू इतना प्यार करती थी
मैं कल कल करती आती थी ।
तू क्यू माँ छोड़ चली गयी
मुझे एक बार फिर गोदी में सुला देती
तू वापस लोहरिया सुना देती
तू तस्वीर बनके रह गयी
मैं कल कल करती रह गयी ।।