एक तस्वीर आखों से ओझल हुई है..
मुझसे लिपट के तो ये तन्हाई भी रोई है...
ओझल हुई तस्वीर को सीने से लगा के रखा हूं...
बेवक्त बरस जाए इतना आशु छुपा के रखा हूं...
बरसात में भीगी भीगी बूंदे अहसास को जगा देती है..
बंद कमरे में किसी की आहटे हमे नींदों से उठा देती है...
एक तस्वीर इस तरह आखों से ओझल हुई है..
मुझसे लिपट के तो ये तन्हाई भी रोई है...