-: चार दिवस की जिंदगी :-
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चार दिवस की चमन जिंदगी एक दिन पतझड़ आएगा ।
महका दे फूलों से जीवन नहीं तो फिर पछताएगा ।।
बसंत की बहार जीवन में जब तक ।
भौंरे गुंजत फिर फिर तब तक ।
कोयल और पपीहा कुहके ।
हरी डाल हैं तेरी जब तक ।
जीवन की डाल जब सूखेगी तो पास कोई नहीं आएगा ।
महका दे फूलों से जीवन नहीं तो फिर पछताएगा।।
जीवन की पतझड़ जब आती ।
यौवन पत्तियां सब जड़ जाती ।
नव कोंपल हंसती है उन पर ।
जो पत्तियां जड़ जाती हैं ।
"चूंडावत" कहे हंस मत कोंपल तेरा दिन भी आएगा ।
महका दे फूलों से जीवन नहीं तो फिर पछताएगा।।
रचनाकार :- नरपत सिंह चूंडावत, ननाणा,
आमेट, राजसमंद, ( राजस्थान )