मैं जैसी हूं वैसी अच्छी हूं
क्यों रखु अपने चहरे पर मुखौटा अलग अलग प्रोडक्ट का
क्यों सजू उन भारी गहनों से जो मुझे पसंद ही नहीं
नहीं जरूरत मुझे किसी की झूठी तारीफ की जो तुम मेरी नहीं उस झूठ की करोगे जो मैंने अपने चहरे पर सजा रखा है
मुझे पसंद है अपनी सादगी का गहना
जो मेरे चहरे से नहीं मेरे मन से जुड़ा हो
मैं जैसी हूं वैसी अच्छी हूं
#गहना