ज़िन्दगी के इस अँधेरे जंगल में
कोई कानों में धीरे से कुछ कहता है
सूखे पत्तों के जैसी आहट है उसकी
अपने होने का अहसास दिलाता है
जो संबल बनकर सहारा देता है
कोई तो है जो आसपास रहता है
आँखों की पकड़ से दूर है वो
मगर दिल उसकी गवाही देता है
बिना किसी शोर के आवाज़ है
जो ख़ामोशी से साथ चलता है
परछायीं भी साथ छोड़ जाती है जहाँ
वो मेरा हमकदम बनकर साथ देता है
ये मेरा आत्म विश्वास है यकीनन
जो हर वक्त मेरे आस पास होता है
- अनिता पाठक