"" राजनीति बूढी हो चुकी है"
अब ना सोच यहाँ नई है
ना रोष किसी में बची है
उम्र भी सबकी यहाँ साठ,सत्तर,अस्सी है
राजनीति की डोर बूढो में ही फँसी है
के अब राजनीति बूढी हो चुकी है ।
नज़रिया अब देश का भी युवाओं सी है
बात मिट्टी की भी बदल गई है
माँग रही राजनीति खून नई है ।।
कब तक खून पुराना इस देश की राजनीति को सिंचेगा
कब तक बूढा देश के राजनीति के रथ को खींचेगा??
हिल रही है अब नींव इसकी
के राजनीति बूढी हो चुकी है
माँगती अब ऐ खून नई है ।
के आओ युवाओं,
अब इसकी रीढ़ की हड्डी बन इसे संभालो तुम
जागो अब इस देश का भार उठालो तुम ।।
~~~~अमित RAJ(अनिता का बेटा)