किसी हुक्मरान के दौर मे खुलकर बोल रहे हो, विरोध कर रहे हो तो, ऐसा कभी मत समझना यह उस हुक्मरान कृपा है, यह तो हमारे संविधान की महानता है, वरना एक पल मे यह सब बदल देंगे । कोई यह नही चाहेगा की उसपर कोई बंदिशे हो, कोई उसे पुछने वाला हो । हर कोई आजाद पंछी की तरह उडना चाहता है, फिर सत्ता तो सबकुछ बदल कर रछ देती है, सत्ता का नशा ही कुछ ऐसा होता है ।
हम उन के प्रति कृतज्ञता दिखाए, जिन्होंने हमारे लिए अपना सारा जिवन भौतिक सुख से त्याग कर, जेल की जिंदगी पसंद की । अपने परिवार, छोटे बच्चों का मोह कभी उनके देशभक्ति के आगे टिक ना सका । उनके लिए सभी की पीड़ा समान थी, वह इन्सान के खुन को सिर्फ लाल ही समझते थे, अपना समझते थे । आज कोई राजनेता ऐसा विचार करना नामुमकिन है, क्योंकि हम लोगों ने उसे वैसा करने पर मजबुर कर दिया, यह बदवाव सिर्फ उसके एकेला का थोडी है ? हमारा भी बहोत योगदान है ।