आज के भागदौड़ वाले जीवन में मनुष्य को अपने और अपनों के लिए समय नहीं मिल पाता है। परिणामस्वरूप एक समय ऐसा आता है कि वह अकेला हो जाता है जिससे वह अवसादग्रस्त हो जाता है। वह मानसिक रूप से तनावग्रस्त और बीमार भी हो जाता है। कभी-कभी सुशांत सिंह राजपूत जैसी दुखद घटना भी घट जाती है। ऐसे में मनुष्य को चाहिए कि वह स्वयं को अपनी अन्य रुचियों में व्यस्त रखे। समय समय पर लोगों से मिलता-जुलता रहे। सबसे बेहतरीन उपाय है कि वह साहित्य, संगीत और अन्य कलात्मक विधाओं में अपना मन लगाए क्योंकि ये विधाएँ हर प्रकार के अवसाद से निकालने का सर्वोत्तम साधन हैं।
डॉ लवलेश दत्त, बरेली
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