# सपने...
कुछ आधे अधूरे सपने
राह में आज मिल गए
किताबों में दबे फूल
जैसे फिर से खिल गए
कुछ सपनों का साथ था
हम ने न दिया
कुछ सपनों ने हमें था
बेदखल किया
आज भी वो वहीं
खड़े मुस्कुरा रहे थे
अपने पूरे होने कि
राह दिखा रहे थे
लो आज फिर कुछ नया
करने कि चाह जागी है
सपनों मे फिर से रंग
भरने कि दुआ मांगी है
चलो फिर कुछ नए सपने बुनते हैं
पर उन्हे किताबों में रखे
फूलों से नहीं
अपनी कोशिशों से गिनते हैं। ।
...रंगोली