#spiritualयाromantic
बावरो मन, युँ बावरेपन में,
के के रसम कियो ?
पूरो बखत ना साँस लियो,
थारे प्रेम का रस पियो!
ना मंदिर ना गिरजा जायो,
ना कछु सजदा कियो।
एक ही धून में मगन भयो,
बस थारी लगन लियो!
जागे सोते चैन ना पायो,
थारो नाम ही गायो।
एक बात रटते रटाते,
देही, छेही;दियो।
संग भयो, ते रंग भयो,
ते अंग में सकल भयो!
अंत में अमर भयो जे,
घट में, घट बन के जियो...
© लीना प्रतीश