#लापरवाह
मैं कौन हूँ, कहाँ हूँ ?
जहाँ भी हूँ वहाँ हूँ।
कौने कौने में ,
नज़र है मेरी,
मैं हर एक जग़ह हूँ।
अभी के अभी
पेशी करा दो,
ताज की गवाह हूँ!
हाये, ओये,उफ्फ,
अरे- ही नहि;
मैं आह से आहा हूँ!
बेशकीमती बन्दे
रखे है मैंने सीने में,
दिखती भले लापरवाह हूँ...
© लीना प्रतीश