माना रात के अंधेरे में बहुत डराती है, ये सुनसान सड़कें
एक खौफ सा भीतर तक भर जाती है, ये सुनसान सड़कें
रात के अंधेरे में पराई सी लगती है, ये सुनसान सड़कें
लेकिन बेघर गरीबों को राहत देती है, ये सुनसान सड़कें
उनकी दिनभर की थकान मिटाती है, ये सुनसान सड़कें
लेकर आगोश में चैन की नींद सुलाती है, ये सुनसान सड़कें
गरीबों का आशियाना बन जाती है, ये सुनसान सड़के।।
सरोज ✍️