Hindi Quote in Poem by VANDANA VANI SINGH

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प्रियतम तुम 



प्रियतम तुम मुझसे कहते हो , 

हम मे तुम मे कुछ भेद नहीं। 

इस बात को तुम भी मान लो , 

तुम जैसे हम नेक नहीं। 

प्रियतम तुम.............. 


प्रियतम जिस समाज को तुमने , 

धर्मो मे विरक्त कराया है। 

मेरे मन की अभिलाषाओ ने , 

उससे भी परे कुछ पाया है। 

प्रियतम तुम............ 


प्रियतम अनजानी बात है ये , 

दिल आज मेरा भर आया है। 

मंदिर मस्जिद के भेद मुझे ,

आज तलक समझ ना आया है। 

प्रियतम तुम............ 


एक प्रेम जोगन की अभिलाषा, 

इतनी आसान नहीं होती है। 

उस दिये की मै जलती ज्यो , 

जिसका तुमने तेल चुराया है। 

प्रियतम तुम............. 


प्रियतम तुम धर्म की बात करो , 

मेरी जात समझ ना आई है। 

प्रियतम धर्म की ये कूटनीति , 

भला किसने इसे बनाई है। 

प्रियतम तुम.........

वंदना सिंह

Hindi Poem by VANDANA VANI SINGH : 111501384
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