हास्य व्यंग्य
अम्मा जी कहिन...'
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हमारी एक मित्र है ...दोनो ही खलिहर बैठे थे ...हम थोड़ा ज्यादा ही खलिहर थे ...का करें... समय नहीं कट रहा था फोनिया दिए। उन्होंने बातों ही बातों में छेड़ दिया...अम्मा जी का क्या हाल-चाल है। लॉक डाउन सीरीज में तो उनके बहुत चर्चे थे। अचानक से गुमशुदा की तलाश हो गई है। अब क्या कहते ...अम्मा जी आजकल कंफ्यूजिया गई है कि ये मुआ लॉक डाउन लगा क्यों था। एक दिन बड़े बुझे मन से बोली...इस लॉक डाउन के नियम हम आज भी समझने की कोशिश कर रहे हैं। जब लॉक डाउन 1.0 था " न आप ये कर सकते थे न वो कर सकते थे" ...फिर लॉक डाउन 2.0 आया ..'आप ये तो कर सकते थे पर वो नहीं कर सकते थे।" सच बताये बिटिया...हम तब ज्यादा कंफ्यूजिया गए... जब लॉक डाउन 3.0 आया... "आप वो कर सकते हैं पर ये नहीं कर सकते।" मजा तो तब आया... जब लॉक डाउन 4.0 आया..."आप ये-वो कर सकते हैं पर वो-ये नहीं कर सकते।" फिर आया अन लॉक "आपको जो करना है करो हम कुछ भी नहीं कर सकते" ..."अरे भईया... ये बात आपको इतनी देर में क्यों समझ में आई।आप वैसे भी कुछ नहीं कर रहे थे ...अल्बत्ते हम कन्फ्यूज जरूर हो गए।
हम ने दूसरी बात छेड़ दी...और अम्मा जी बहुरिया का क्या हाल है।अम्मा जी ने वो बुरा मुँह बनाया कि पूछिये मत..."ये आजकल की लड़कियाँ बच्चे थोड़े पैदा करती है।साक्षात रामचन्द्र जी अवतरित होते हैं ...बिस्तर से पैर नहीं उतारने देती। कल हमसे बोली... "अम्मा जी अब तो बेटा बड़ा हो गया है। सोच रही हूँ.. देखभाल के लिए नैनी रख ले।" ..."लल्ला तो दिन-भर हमारी आँखों के सामने ही खेलता रहता है।अचानक से इतना कब बड़ा हो गया ...और हमें पता भी नहीं चला और ये लल्ला की नानी को काहे रखेगी ...वो इस उमर में बच्चा कैसे संभालेगी। अरे..समाज क्या कहेगा...दादी के होते ... नानी को बुला लिया।"
हँसते- हँसते बुरा हाल था। अम्मा जी...आपकी बहू नैनी के लिए कह रही है... नानी के लिए नहीं।बच्चों की आया... दिन-भर आपके बच्चे का ध्यान रखेगी। "आग लगे ऐसे जमाने को। हमारा ब्याह 16 बरस में हो गया था और 23 साल की उमर तक चार बच्चे हो गए थे।अम्मा का चेहरा अलौकिक तेज़ से चमक रहा था।अपने कृत्य को ऐसे खुशी से बता रही थी मानों गिनीज बुक रिकॉर्ड की कोई ब्रेकिंग न्यूज़ घटना है।जानती हो बिटिया ...चार महीने पहले हमारा लल्ला पैकेट में गीली वाली रुमाल लेकर आया था ...बोला अम्मा इसको वाइप्स कहते हैं... मुँह पोंछने के काम आता है।बिटिया हम तो वाइपर सुने रहे...जो गाड़ी में पानी पोंछने के लिए लगा रहता है और एक घर में...जो बाथरूम में रखा रहता है। अम्मा जी की सादगी पर हमें हँसे बिना रह सकें।
....पर बिटिया एक दिन हमारे छोटे लल्ला अपना कपड़ा खराब कर दिए... हम बहुरिया को उसी तरह की गीली रुमाल से शरीर पोंछते देखे...सच्ची बता रहे कसम से मन उतर गया। अब हम कभी गीली रुमाल से मुँह नहीं पोंछेंगे।
डॉ. रंजना जायसवाल