आज छत पर बैठे बैठे ढलते सूरज को देख रहा था,ढलते सूरज का रंग एक दम एकतरफा और सुनहरा था जैसे सोना पिघल रहा हो और ढलते ढलते रात सौप गया असामान को धीरे धीरे आसमान में आधा चाँद और आसपास तारे दिखने लगे ...
ये हल्की चांदनी वाली रात ले आया मेरे लिए ढेर सारा सुकूँ और तुम्हारी यादें; वो यादे जो हमने एक साथ रखकर एकदूसरे को हमने दिया है । ये लम्हे रात में आँखों पर आगे जाकर नींद सौप जाते है और गहरी नींद आगे सौप जाती है ख्वाब ..
ख्वाब ...कितने रंगीन होते है न ? यहाँ भी मेरी बातें आकर रुकी भी तो ख्वाब पर सिर्फ तुम्हारे ख्वाब । वहां भी हम साथ होते है ..वहाँ भी तुम कभी कभी रूठ जाती हो वहाँ भी मैं तुम्हे मनाते मनाते थक जाता हूँ ..
और तुम मुझे हारता देख मेरा माथा चुम कर मुझे जीता जाती हो ..और इस जीत की हँसी हम दोनो के चेहरे पर बनी रहती है सुबह मेरी आँख खुलने तक वैसे तो मै सब भूल जाता हूँ पर रह जाती तो बस वो स्मृतियां जो किसी पदचिन्ह की तरह छप गये है अनन्तकाल के लिए !!