भारत से कह जाऊँ
गंगा को बहने देना,
सेना को चलने देना
सीमाओं को तरने देना।
हिम शिखरों तक बढ़ते रहना
सागर तट तक चलते रहना,
हवाओं में मिलते जाना
उजालों से जगमग रहना।
जिह्वा पर आते रहना
वृक्षों सा फलते रहना,
दहाड़ सिंह सी सतत रखना
आँखों को खुले रखना।
नाम में हर रंग भर देना
कर्म में हर लय ले आना,
स्नेह से हाथ मिलाना
जीवन को जय में रखना।
**महेश रौतेला