जमाल-ए-दिलफरोज, हाय उनका यह चहेरा,
सूरते-मेह्रे-निमरोज, इन आँखोंमें छाये पहरा।
बा-अदब झुक के अहतराम करलु फ़िलहाल,
फिर चाहे हो गुरुर-ए-इज्ज-ओ-नाज़ गहरा।
Dp,"प्रतिक"
:- जमाल-ए-दिलफरोज=मनोहर करने वाला चहेरा।
:-सूरते-मेह्रे-निमरोज=दोपहर के सूरज के समान।
:-गुरुर-ए-इज्ज-ओ-नाज़=सम्मान और रूप का अहंकार।