#सोमवार_को_ग्लेनमार्क_फ़ार्मा ने करोना की दवाई निकाली 103 रूपेय की एक गोली 34 गोली का पत्ता 3500 रूपेय का , किसी मंत्रालय ने उसके दावे पर सवाल नहीं खड़ा किया , किसी ने उससे कोई सबूत नही माँगा की यह गोली करोना ठीक कर सकती है या नही पर जैसे ही बाबा रामदेव ने पाँच सौ रूपेय में करोना की किट निकाली सारे बुद्धिजीवी इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करने लगे l
जबकि आयुष मंत्रालय जो ख़ुद इस बीमारी से लड़ने के लिए आयुर्वेदिक काढ़े का ज़ोर शोर से प्रचार कर रहा है वो भी तलवार भाँजने लगा l इस घटना ने दिखा दिया की यह मंत्रालय कहने को भले ही मोदी जी और हर्षवर्धन के आधीन काम करता हो पर वास्तव में यह अंग्रेज़ी दवा कंपनीज के इशारे पर नाचने वाली कठपुतली है l
किसी सरकारी मंत्रालय ने आज तक Fair & Lovely क्रीम बनाने वाली कम्पनी से यह दावा सिद्ध करने को नहीं कहा की उनकी क्रीम से काली लड़की गोरी हो जाती है क्योंकि उनसे इन अधिकारियों को मोटी धनराशि जो मिलती है अपना मुँह बंद रखने के लिये l
आयुष मंत्रालय व भारत सरकार ने बाबा रामदेव से कोरोना की दवाई के वैज्ञानिक प्रमाण मांगे है, उसके बिना प्रचार नही करने को कहा है।
इनसे कोई पूछेगा कि फेयर एंड लवली ने गोरे होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण दिया था ???
हार्लिक्स, बोर्नविटा, बूस्ट आदि ने height बढ़ने और ताकत बढ़ाने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण दिया था क्या ?
लक्स साबुन ने केसर,दूध बादाम मिले होने का प्रमाण दिया था क्या?
मार्केट में चल रही ट्रायल की दवाएं क्या उनका कोई प्रमाण है क्या?
तो फिर 100%शुध्द भारतीय कंपनी पतञ्जलि से ही प्रमाण क्यो?
विदेशी कम्पनियों को पूरी छूट है।
आज की तारीख़ में बाबा रामदेव की विश्वसनीयता आयुष मंत्रालय से सौ गुना अधिक है l यह दवाई बाज़ार में आने दो , जनता इसे हाथो हाथ लेगी l आयुष मंत्रालय वालों तुम देखते रहना l