बातें कुछ अनकही सी, अनसुनी सी होने लगी,
जब उनसे इशारों में गुफ़्तगू होने लगी..
खामोशियाँ भी गुनगुनाने लगीं,
मदहोशियां सी छाने लगी..
रूह मुस्कुराने लगी,
मैं ख्वाब सजाने लगी..
बातें दिल में छुपाने लगी,
बिन-बात मुस्कुराने लगी..
तेरा होना रूह की ज़रूरत होने लगा,
तेरा जाना दिल को तन्हाई देने लगा..
इज़हार-ऐ-इश्क़ की तमन्ना थी, मगर कर न पाए,
तुम्हें दूर से ही देखकर, मन-ही-मन मुस्कुराये..
काश..!! कि बता पाते तुम्हें कितनी मोह्ब्बत करते हैं,
जीना तो हमको भी पसंद है, पर तुम पर बेखौफ मरते हैं..।।
-Richa Agarwal(Chiraiya)