"भ्रष्ट मानसिकता पारस पत्थर की तरह है , जो भी सम्पर्क मे आता है उसे भी भ्रष्ट बना डालती है| भ्रष्ट केवल वो नही जो भ्रष्टता करे , वरन् वह भी है जो उसमे सहयोग करे | वैसे आज के परिपेक्ष्य मे एक पूरी जमात इसकी आदि हो चुकी है, जो उनके जीवन की कमियों को छुपा उनका जीवन आसान कर रही है | मुश्किल तो केवल उन कुछ लोगो के लिए है जो चाहकर भी भ्रष्ट नही हो पाते, क्योकि भ्रष्टता के लिए पूँजी आवश्यक है | यही लोग भ्रष्टता के खिलाफ आवाज उठाते है , उन पच्चीस प्रतिशत लोगो के साथ मिलकर जो हृदय से भ्रष्टता का तिरस्कार करते हैं|"
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