वह नयन ही क्या जिसमें सपने ना हो,
वह चयन ही क्या जो अपने ना हो ।
वह फूल ही क्या जिसमें खुशबू ना हो,
वह शूल ही क्या जो चुभती ना हो।
वह दर्द ही क्या जो याद ना हो,
वह जिंदगी ही क्या जिसमे जीने का तरीका ना हो,
वो जन्नत ही क्या जिसमे मन्नत पूरी ना हो।
वह मुस्कान ही क्या जिसमें खुशी ना हो.