चाँद
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तूँ मेरा चाँद था।
तुझ से मेरी रात सुहानी थी।
तेरी अनुपम शोभा थी।
तेरी पहचान थी।
तुझ से मेरी शान थी।
मेरे आसपास निरंतर
प्रदक्षिणा करता था।
तुझसे जीवन सागर में
अनगिनत तरंगें उठती थी।
तुझसे ज्वार-भाटा होता था।
तुझे देखकर प्यार करते थे।
तूँ शीतल चाँदनी देता था।
तूँ ही प्रेमरस जगाता था।
तूँ अमृत बरसाता था।
तुझसे प्रेम, प्रियतम की लंबी उम्र की दुआ करते थे।
तुझे देखकर कमल खिलते थे।
तूँ मुझे से अभिन्न था।
तूँ वही चाँद है
तूँ अपशुकन बन गया।
तूँ सुनामी लाया।
तूँ तूफान लाया।
तूँ भूकंप लाया।
तू ही है मेरे चढ़ते
दिन दोपहर में अंधकार लाया।
तूने ही कलंक लगाया।
तूँ ही है जिसने ग्रहण लगाया।
दीपेश कामडी 'अनीस'
21 जून,2020
(सूर्यग्रहण के सन्दर्भ में)