# उन्नति
कोई खुश है आज
भरपेट खाना मिला है,
कोई मगन है अपने सुंदर से
घर - आंगन को देख कर।
कोई तृप्त है, लौट आया
बच्चा घर सुरक्षित,
कोई खुश है चश्मे की दुकान खुली आज,
वो भी जिसे साफ साफ दिखा,
वो भी जिसने पैसे को देखा आज।
कहीं पुआ बन रहा,
कोरोना काल में
पूरा वेतन जो मिला है,
किसी की नौकरी बच गई है
परिवार टी पार्टी कर रहा है।
कलाकार खुश,
लाइव आ रहे,
प्रशंसक खुश हैं,
उनसे साक्षात्कार
कर रहे।
पाठक खुश,
नई किताब मंगवाई है,
बच्चे खुश,
मां घर पर है
और स्कूल बंद है।
कल बारिश हुई है
किसी का मन भींगा है,
बिटिया छत पर छप छप कर रही,
और नन्हें बेटे की नाव
चींटी को बचा रही।
किसी के यहां सुंदर फूल खिला है,
कोई खुश है पार्क की हरियाली से,
किसी को नभ का अनंत छोर आह्लादित कर रहा,
कोई डूबा है धरा की सौंधी सुगंध में।
और वहीं कोई बेचैन है
ऊंचा घर, बैंक बैलेंस, बड़े ओहदे पर भी,
शेयर मार्केट डावांडोल है,
जमीन के दाम गिर गए हैं,
मॉल में कोई आ नहीं रहा,
फिल्में चल नहीं रहीं।
किसकी उन्नति हुई है,
कौन उन्नत है?