मोहब्बतों में अगर कोई रस्म ओ राह ना हो...
सकूँन तबाह ना हो ज़िन्दगी गुनाह ना हो...
अदाकारी भी लाज़मी है दिल्लगी के लिए...
किसी से प्यार अगर हो तो बेपनाह ना हो...
इस इनायत से मैं तेरे साथ साथ चलता हूँ...
तेरी निग़ाह से आगे तो मेरी निग़ाह ना हो...
मेरा वज़ूद है मेरी सच्चाईयों का आईना...
ये और बात है के मेरा कोई गवाह ना हो...