Pa pa pagli...
जब कभी वो लगाते थे फटकार
तब तब वो आते भी थे करने प्यार
हैं तो वो भी भगवान के रूप ...
माँ की तरह ही है , पर उससे अलग भी है.
जब कभी जो ग़ुस्सा करते ,
महादेव की तीसरी आँख खोलते ।
उनका प्यार माँ के प्यार से था काफ़ी अलग !!
लेकिन जो कभी मुझ पर मुसीबत आती ,
वो ही थे जो इस मुसीबत को दुर भगाते।
पिता से ही नाम मेरा , उनसे ही संसार मेरा।
Happy Father’s Day 🤗
Poetry by • Jill शाह •