Hindi Quote in Poem by Bhuwan Pande

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बूंदें ...

सागर की छाती से
उठी उड़ी कुछ बूंदें -
छोड़कर नीचे सागर के पानी में
सारा खारापन कटुता

और
बैठ बादलों की गोद में
हवा के संग झूलती हुई
घूमने लगी आकाश में
खोई मस्ती में मोद में

तब
बूंदें भूल गईं
अपनी सारी कटुता खारापन
भूल गईं -
कि वो भी कभी सागर थीं
कि वो भी कभी लहरें थीं
और खेलती मछलियां गोद में

वो तो बस
आकाश की हो गईं थीं
बादलों की हो गईं थीं
हवाओं की हो गईं थीं
और परिंदों सी उड़ने लगी थीं

पर फ़िर कुछ ऐसा हुआ
जिसने मिटा दी
सारी दूरियां
सारे भ्रम बूंदों के

आकाश में बादलों को
लगा ज्यों वो बूंदें सारी
हो गईं भारी सागर सी
और
तब वो गोद बादलों की
झर झर कर झरने लगी
लिए बूंदों की बारात सारी
सागर की ओर ...

:- भुवन पांडे

#कटु

Hindi Poem by Bhuwan Pande : 111472396
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