ठहरी सी थी जो ज़िंदगी
शीघ्र ही चल पड़ी है
मुसाफिरों की भीड़ भी
सिर उठाकर चल पड़ी है
कुछ आंखो में है डर
कुछ के खुशी बड़ी है
इन काफिलों के ज़हन में
सवालों की लड़ी है
जवाबो के तलाश में
फिर से यह चल पड़ी है
ठहरी सी थी जो ज़िंदगी
शीघ्र ही चल पड़ी है!!!!!
#शीघ्र