शीघ्र त्याग कर अहं मित्रवर, मानवता का दीप जलाओ।
आलस, तन्द्रा, जड़ता छोड़ो, ऊंच-नीच का भेद भुलाओ।।
जो नजर उठे निज धरती पर, उसको सबक सिखाना होगा।
शीघ्र आज ड्रैगन के फन पर,नर्तन हमें दिखाना होगा।।
वह भूल चुके हैं निज मन में, यह राम-कृष्ण की धरती है।
यहां भवानी रिपु शोणित से, अपने खप्पर को भरती है।।
हमने पूजे हैं बम-भोले ,बम-गोलों से ना डरते हैं।
जिसने भी दो-दो हाथ किये, वह शीघ्र समर में मरते हैं।।
पिछले घाव नहीं हम भूले, तुम भाई-भाई रटते थे।
सदा पीठ में छुरा भोंकते,रण में सम्मुख ना डटते थे।।
कैलाश ले लिया धोखे से, तो निज मन में इतराते हो।
है बड़ा भरोसा शस्त्रों पर, फिर भी रण से घबराते हो।।
अगर समर की ठानी तुमने, तो तुमको धूल चटायेंगे।
अब बात नहीं फिर से होगी, यमपुर का पता बतायेंगे।।
#शीघ्र