जगह , समय , उपयोगी कितना , हैं कारक कीमत तय करने का
कृषि सूखे फिर हो वर्षा , कोई कीमत नहीं तब पानी गिरने का
शीत में धूप है अमृत सी , वहीं ग्रीष्म में अकुलाएं दिन फिरने का
कीमत घटती और बढ़ती है , है निर्भर वस्तु के मिलने का
प्रयास वस्तु की कीमत है , मिली सहज , तो कीमत गिरने का
लोग किसे कितना चाहें , कीमत है लोगों से घिरने का
होते थे जो अनमोल कभी , अब हैं बेमोल जमाने में
कीमत नहीं बढ़ती है उनकी , लगते कीमती जताने में
#कीमती