सुनें सबकी करें अपनी 😁
इस जीवन को कैसे जिया जाये,
जीते जी विष कैसे पिया जाये।
दिखे कुछ ग़लत तो आवाज़ उठानी है,
पैसा, हैसियत ना हो तो अनसुनी हो जानी है।
यहाँ बिना स्वार्थ के न कोई हाथ बढ़ाएगा,
बिना मांगे मदद कर दे वो चापलूस कहलाएगा।
भूखे को न खाना दें तो हृदयहीन हैं,
और दे दें तो दिखावे के शौकीन हैं।
गाड़ी न हो अगर तो पूछेंगे जीवन में क्या कमाया है,
और होगी तो कहेंगे रिश्वत से पाया है।
जो करेंगे उसमें कमियाँ निकालेंगे,
और न करेंगे तो निकम्मा मानेंगे।
कैसे इन सब का जवाब दिया जाये,
अब बोलो क्या किया जाये ?